Raj Babbar: कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को दो साल की सजा, MP-MLA कोर्ट ने सुनाया फैसला जानें क्या है 26 साल पुराना वो मामला.

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राज बब्बर, ( कांग्रेस नेता )

 Raj Babbar. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को दो साल की सजा सुनाई गई है। कांग्रेस नेता राज बब्बर को चुनाव के दौरान मतदान अधिकारी से मारपीट करने के मामले में एमपी एमएलए कोर्ट ने दो साल की सज़ा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने 8500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. राज बब्बर सरकारी कार्य बाधा और मारपीट के दोषी ठहराए गए हैं.  


पूर्व सांसद और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राज बब्बर को 26 साल पुराने मामले में एमपी एमएलए कोर्ट ने दो साल की सज़ा सुनाई है, इसके साथ ही कोर्ट ने 8500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. हालांकि जेल की सजा होने के थोड़ी देर बाद ही उन्हें 20-20 हजार रुपये की दो जमानतों और एक निजी मुचलके पर जमानत मिल गई है.

मतदान अधिकारी से मारपीट का था मामला.

राज बब्बर पर सरकारी कार्य बाधा और मारपीट के दोषी पाया गया है. राज बब्बर फैसले के वक्त कोर्ट में मौजूद रहे. 2 मई 1996 में मतदान अधिकारी ने वजीरगंज में एफआईआर दर्ज कराई थी. राज बब्बर वहां से सपा के प्रत्याशी थे. मतदान अधिकारी से मारपीट का था मामला. बता दें कि एक महीने के अंदर जिला कोर्ट में सज़ा के खिलाफ अपील कर सकते हैं. एमपी एमएलए कोर्ट ने राज बब्बर को दो साल की सज़ा सुनाई है.

फर्जी मतदान का आरोप लगाकर की थी मारपीट.

यह मामला 26 साल पुराना यानी 1996 का है. उस वक्त राज बब्बर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हुआ करते थे. पोलिंग ऑफिसर श्रीकृष्ण सिंह राणा ने दो मई, 1996 को थाना वजीरगंज में राज बब्बर समेत कई और लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जिसमें आरोप लगाया कि जब मतदाताओं का आना बंद हो गया तो वे खाना खाने जा रहे थे। तभी सपा प्रत्याशी राज बब्बर साथियों के साथ आए और फर्जी मतदान का झूठा आरोप लगाने लगे। उन लोगों ने वादी एवं शिव कुमार सिंह को मारा पीटा, जिससे उन्हें चोट आई। उन्हें मतदान अधिकारी मनोज कुमार श्रीवास्तव के अलावा वीके शुक्ला एवं पुलिसवालों ने बचाया। पुलिस ने 23 सितंबर 1996 को राज बब्बर व अरविंद यादव के खिलाफ चार्जशीट पेश की।

 24 वर्ष बाद राज बब्बर के खिलाफ आरोप तय किए.

कोर्ट ने 24 वर्ष बाद 7 मार्च 2020 को राज बब्बर के खिलाफ आरोप तय किए। श्रीकृष्ण सिंह राणा, शिव कुमार सिंह, मनोज श्रीवास्तव, चंद्र दास साहू, डॉ. एमएस कालरा ने गवाही दी। राज बब्बर ने 10 मई 2022 को कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया, लेेकिन कोई साक्ष्य देने से इनकार कर दिया। 

 
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