Uttarakhand : प्रदेश सरकार की पहल, सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्पों का होगा अध्ययन, स्पेशल टास्क फोर्स की तीसरी बैठक आयोजित हुई। सब्सिडी भी दी जाएगी.

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प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्पों का अध्ययन किया जाएगा। सरकार ऐसे विकल्पों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी भी देगी। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू ने स्पेशल टास्क फोर्स की बैठक में यह निर्देश दिए हैं। बुधवार को सचिवालय में मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू की अध्यक्षता में सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स की तीसरी बैठक आयोजित हुई।

स्वयं सहायता समूहों को शामिल करते हुए योजनाएं तैयार की जाएं।

मुख्य सचिव ने सभी जिलास्तरीय टास्क फोर्स को एक्टिव मोड पर रखते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगे प्रतिबन्ध को लागू करवाए जाने की बात कही। उन्होंने प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसके लिए स्वयं सहायता समूहों को शामिल करते हुए योजनाएं तैयार की जाएं।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगे प्रतिबन्ध को लागू करवाया जाए।

बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने कहा कि सिर्फ सिंगल यूज प्लास्टिक ही नहीं, बल्कि हर प्रकार के प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करने के लिए और आमजन में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कदम उठाए जाने चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी जिलास्तरीय टास्क फोर्स को एक्टिव मोड पर रखते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगे प्रतिबन्ध को लागू करवाया जाए।

स्कूलों को भी इस अभियान में शामिल करने की बात कही। 

इसके उद्योग से जुड़े लोगों और व्यापारियों को भी शामिल करते हुए प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि कौन से प्लास्टिक प्रतिबंधित हैैं, कौन से प्लास्टिक प्रतिबंधित नहीं हैैं, इस पर छोटी-छोटी वीडियो क्लिप्स के माध्यम से जानकारी आमजन और व्यापारियों को दी जाए। उन्होंने स्कूलों को भी इस अभियान में शामिल करने की बात कही। कहा कि बच्चों को इसके दुष्प्रभावों की जानकारी देकर अपने परिजनों को इसके नुकसान के प्रति जागरूक किया जाए। 

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों को शामिल करते हुए योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्लास्टिक के क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं, इस पर एक अध्ययन कराया जाए, ताकि इसके विकल्पों के लिए सब्सिडी देकर बढ़ावा दिया जा सके।

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